Friday, September 22, 2006

मनमोहन सिंह की दुम

हमारे मनमोहनजी के बारे आम धारणा ये है कि वे अर्थशास्त्र के विद्वान हैं परंतु ये बात उनके प्रधानमंत्री बनने के बाद ही उजागर हो पाई कि उन्हे अर्थशास्त्र से भी ज्यादा 'दुम हिलाने में' महारत हासिल है और जिसमें शायद वे दुनिया में नंबर १ हैं।
लोग कहते हैं कि उन्हे प्रधानमंत्री पद तक पहुँचाने का श्रेय सोनिया गाँधी को जाता है परंतु हमें तो लगता है कि इसका श्रेय उनकी महान 'दुम' को दिया जाना चाहिए, जिसे हिला हिला कर इन्होने बता दिया कि 'मैडम की चरण-वंदना' उनसे अच्छी कोई नहीं कर सकता तभी तो जब लाभ के पद के मुद्दे पर मैडम की सदस्यता खतरे में दिखी तो ये उनके वफादार कुत्ते की तरह दुम हिलाते हुए संसद जा पहुँचे और लाभ का पद विधेयक पास करा लाए। हालाँकि ये दस जनपथ के सबसे वफादार पालतू हैं और वर्षों से दुम हिलाते आ रहे हैं, इसके बावजूद इन्हे मैडम से भौंकने की अनुमति नहीं मिली है। तभी तो इनके मंत्री जब-तब अपनी मनमर्जी चलाते रहते हैं। वैसे बेचारे मनमोहनजी त्रस्त तो उन नामुराद कम्युनिस्टों से भी हैं जो हमेशा इनकी दुम के पीछे पड़े रहते हैं।
वैसे ये जरूरी नहीं कि इनकी दुम मैडम के सामने ही हिलती हो, ये जरूरत-बेजरूरत किसी के सामने भी हिल सकती है। लेकिन चूँकि इनकी मालकिन विदेशी हैं इसलिए ये विदेशियों के सामने कुछ ज्यादा ही हिलती है। दस जनपथ के साथ-साथ ये अपना नाम अंकल सैम के पालतुओं की लिस्ट में पहले ही दर्ज करा चुके हैं।इस महीने हवाना में निर्गुट देशों के शिखर सम्मेलन में जहाँ सभी नेता आतंकवाद के खिलाफ एकजुट नजर आए वहीं हमारे मनमोहनजी अंकल सैम के सबसे बड़े दुश्मन (क्यूबा) के घर में ही अंकल सैम के वफादार पालतू (पाकिस्तान) के सामने दुम हिलाते नजर आए। अब ये महाशय ढोल पीटते फिर रहे हैं कि पाकिस्तान बेचारा तो खुद आतंकवाद से पीड़ित है ये क्यों किसी के घर में जाकर आतंकवाद फैलाने लगा। इनका कहना है कि अब ये पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आई एस आई के साथ मिलकर देश से आतंकवाद मिटायेंगे। यद्यपि इन्हे मुशर्रफ के सामने दुम हिलाने का इनाम मिलने की कोई संभावना नहीं है फिर भी ये निस्वार्थ भाव से उसे हिलाये जा रहे हैं।
बहरहाल अगले आम चुनाव २००९ में होंगे, है कोई माई का लाल जो मैडम के सामने मनमोहनजी से अच्छी दुम हिलाकर बताये।

4 comments:

Jagdish Bhatia said...

सरकार अपनी इस हरकत के लिये अपने देश के लोगों को विश्वास में नहीं ले पाई है। इस सरकारी यू टार्न के पीछॆ क्या गणित है यह आने वाला समय ही बतायेगा।

mahashakti said...

आपने अच्‍छा कटाक्‍क्ष किया है, अापका स्‍वागत है।

सागर चन्द नाहर said...

बहुत मजेदार कटाक्ष किया है., पर क्या आप जानते हैं कि बेचारे मन्नू जी को यह लेख पढ़ने के लिये सुपर पी ए से इजाजत लेनी होगी।

Pratik said...

लगता है आप मनमोहन सिंह जी से कुछ ज़्यादा ही रुष्ट हैं। ख़ैर, यह बात तो ठीक है कि उनके विवेक पर 10 जनपथ की आज्ञा हावी है।