Tuesday, November 21, 2006

खाकी चड्ढी का फ़ैशन

मध्यप्रदेश में आजकल खाकी हाफ़ पैंट का बड़ा चलन है जिसे देखो वो खाकी हाफ़ पैंट सिलवा रहा है। हालांकि खाकी हाफ़ पैंट का प्रचलन तो काफ़ी समय पूर्व से है परंतु तब इसे एक दल/संगठन विशेष के लोग ही पहना करते थे। पर इधर जबसे काँग्रेस की नैया डूबी, खाकी पैंट सिलने और बेचने वालों की पौ-बारह है। कोई व्यक्ति भले ही सत्ताधारी दल का कभी कार्यकर्ता भी ना रहा हो, इधर उसने खाकी चड्ढी पहनी उधर उसके बड़े-बड़े मंत्री-संत्रियों से संबंध बने।

खाकी चड्ढी की बड़ी महिमा है। एक महाशय जो कुछ साल पहले मारपीट और ठगी टाइप छोटे-मोटे काम करके अपना गुजारा करते थे, वे आजकल इस चड्ढी की दया से जगह-जगह मंच पर हाथ जोड़े फ़ूलमालाओं से लदे नजर आते हैं। इससे उत्साहित होकर कई नौजवानों ने भी खाकी चड्ढियां सिलवा ली हैं। अब नौजवान लोग खाकी चड्ढी पहनने में संकोच या शर्म महसूस नहीं करते। मेरे एक रिश्तेदार हैं जो कई सालों से इस खाकी चड्ढीधारी दल में प्रवेश के इच्छुक थे पर शर्म के मारे खाकी चड्ढी पहन कर घर से बाहर नहीं निकल पाते थे, पर जब से नई सरकार आई तब से ऐसा फ़ैशन चल निकला कि अब वे गर्व से चड्ढी पहनकर कहीं भी आते-जाते देखे जा सकते हैं।

खाकी चड्ढी वालों की एक विशेषता है कि जब तब इनके फ़ैशन शो आयोजित होते हैं जिनमें कार्यकर्ताओं को रैंप की तरह सड़क पर कैटवाक करना होता है। इस आयोजन में फ़ैशन डिजायनर तो कहीं नजर नहीं आते पर मॉडल बड़ी तादाद में आते हैं। फ़ैशन परेड आयोजित कराने वाले कुछ लोग इनकी कैटवाक की राह में जगह-जगह पुष्प-वर्षा भी करते नजर आते हैं। आजकल चड्ढी के फ़ैशन के कारण मॉडलों की संख्या में बढ़ोत्तरी होने से जब भी ये कैटवाक करने सड़कों पर निकलते हैं तो शहरवासियों को ट्रैफ़िक जाम का सामना करना पड़ता है।

एक समय था जब खादी की इस देश में बड़ी महिमा थी नेता बनने के इच्छुक लोग पहले खादी वस्त्र भंडार पर पाये जाते थे। अब जरा शब्दों में संशोधन हो गया है, खादी में लोग 'द' की जगह 'क' लगाकर नेता बनने लगे हैं। फ़िर इस खाकी को धारण करने के बाद आप चाहे अस्त्र लेकर चलें चाहे शस्त्र, पुलिस की क्या मजाल कि वो आपसे पूछे कि भैया पहले लाइसेंस तो दिखाओ।
खाकी वर्दीधारियों (पुलिस) में इस चड्ढी का बड़ा ही भय व्याप्त है। यदि कोई पुलिसवाला गलती से भी किसी चड्ढीधारी की ओर नजरें टेढ़ी करके देख ले तो बात मुख्यमंत्री तक जा पहुँचती है। खाकी चड्ढी लंबाई में कम होने के बावजूद हर बार खाकी पैंट और शर्ट पर भारी पड़ती है।

कुछ समय पूर्व हमारे मुख्यमंत्रीजी ने खाकी चड्ढीधारी बड़े गुरूओं का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए फ़रमान निकाला कि अब कोई भी व्यक्ति चाहे वह शासकीय सेवा में हो, अपनी राजभक्ति का खुलकर प्रदर्शन करे और खाकी चड्ढी पहनने में संकोच ना करे। इस फ़रमान के बाद तो जो शासकीय सेवक नियमों से बँधे होने के कारण पूरी तरह अपनी राजनिष्ठा को व्यक्त नहीं कर पाते थे, वे अब दम ठोककर कहते हैं कि कोई है माई का लाल जो हमारा ट्रांसफ़र करे या हमारी शिकायत करे।

सो आजकल इस बहती गंगा में सभी हाथ धो रहे हैं। बस रिक्वायरमेंट इतनी सी है कि आप बाजार जाईये और एक खाकी चड्ढी खरीद लाईये और फ़िर जी भर के इस गंगा में डुबकी लगाईये। इस गंगा में डुबकी लगाने का भी बड़ा फ़ल है। चाहे तो प्रसाद के रूप में कोई ठेका ले लो, चाहे किसी का ट्राँसफ़र करवा दो या रुकवाने के पैसे लेलो।
कुछ लोगों का कहना है कि ये फ़ैशन ज्यादा समय के लिए नहीं है, जैसे ही दूसरी पार्टी की सरकार बनी ये खाकी उड़ती हुई नजर आयेगी। 'when in the rome do the romans do' की तर्ज पर हमारा तो यही कहना है भैया कि 'जैसी सत्ता वैसी निष्ठा'। बस इस मंत्र का जाप किये जाओ और मेवा खाए जाओ।

वैसे भी नया फ़ैशन अपनाने में देर थोडे़ ही लगती है। कपड़े हैं जितने चाहे बदलो।

13 comments:

Udan Tashtari said...

अच्छा खाकी महात्म समझाया. आयेंगे, तब सिलवायेंगे, अगर यही सरकार चलती रही. :)

अनूप शुक्ला said...

बढ़िया लिखा है.

प्रभाकर पाण्डेय said...

खाकी पुराण,झकास लेख ।

संजय बेंगाणी said...

तो भैये सिलवालो एक गांधी टोपी और एक खाकी चड्ढी. बारी-बारी से पहनते रहो.

जगदीश भाटिया said...

अच्छा लिखा है :)

Manish said...

आपने अब तक अपनी पैंट सिलवायी या नहीं । :)

mahashakti said...

जो सरकार आती है आपनी नितियों को लाती है, जब काग्रेस थी, तब उसने संघ(आपने कही भी नाम नही लिया है) तब उसने सरकारी कार्मचारियो को संघ के कार्यक्रमो मे भाग लेने पर पाबन्‍दी लगाई थी, और अब सरकार भाजपा कि है तो वह आपने नीतियो को लागू कर रही है। वैसे बात रही आशीर्वाद की तो कागेस मे भी एकल आर्शीवाद पद्वति चल रही है एक विज्ञापन आता था बूढे-बच्‍चे और जवान पहने यंग इण्डिया बनियान, उसी प्रकार मोहन हो या हो अर्जुन और या फिर मि. नटवर सबके सब पहुचे रहते है। तो भातवा के अ‍ार्शीवाद कार्यक्रम पर अपत्ति क्‍यो!

Anonymous said...

भाई
मैने आज तक केवल यही सुना था की अधकचरी जानकारी विनाशकारी होति है । लेकिन आज मैने खुद महसुस की

आपने खाकी धारको क जो चित्रण किया यह कही से भी उचित नही लगता ।
मै स्वंय संघ के कार्यक्रमो में गया हु । आपका केवल उन लोगो से पाला पड़ा है जिनका किसी विचारघारा से कोई सरोकार नही होता केवल अपने तुच्छ स्वार्थ के लिये कुछ भी कर जाते है । मेरा आपसे अनुरोघ है की आप केवल एक बार संघ कि किसी नजदीकी शाखा का भ्रमण करे और उनमे लगे हजारो लाखों निस्वार्थ भाव से लगे कार्यकर्ताओ को देखे और उनके समाज के लिये किये जा रहे कार्यो का मुलयांकन कर्ने के बाद कोई भी धारणा बनाये

वर्ना यह उन लखो लोगो की भावना के साथ खिलवाड़ हो रहा है

आपका
मनोज सेखनी

मनोज सेखानी said...

भाई
मैने आज तक केवल यही सुना था की अधकचरी जानकारी विनाशकारी होति है । लेकिन आज मैने खुद महसुस की

आपने खाकी धारको क जो चित्रण किया यह कही से भी उचित नही लगता ।
मै स्वंय संघ के कार्यक्रमो में गया हु । आपका केवल उन लोगो से पाला पड़ा है जिनका किसी विचारघारा से कोई सरोकार नही होता केवल अपने तुच्छ स्वार्थ के लिये कुछ भी कर जाते है । मेरा आपसे अनुरोघ है की आप केवल एक बार संघ कि किसी नजदीकी शाखा का भ्रमण करे और उनमे लगे हजारो लाखों निस्वार्थ भाव से लगे कार्यकर्ताओ को देखे और उनके समाज के लिये किये जा रहे कार्यो का मुलयांकन कर्ने के बाद कोई भी धारणा बनाये

वर्ना यह उन लखो लोगो की भावना के साथ खिलवाड़ हो रहा है

आपका
मनोज सेखनी

भुवनेश शर्मा said...

प्रमेंद्रजी
आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि मैं ना तो कांग्रेस का समर्थक हूं ना ही भाजपा का विरोधी
ना ही मैने किसी पार्टी के कार्यक्रम पर कोई आपत्ति उठायी है।

साथ ही मनोजजी
रही बात संघ की विचारधारा जानने की तो मेरे चारों ओर संघ के ही लोग बसते हैं यहाँ तक कि मेरे घर में भी।
मैंने संघ की विचारधारा और उसके कार्यक्रमों पर कोई टिप्पणी नहीं की है, मैंने तो आजकल के ट्रेंड पर एक चुटकी ली है, जो इन दिनों मध्यप्रदेश में देखा जा रहा है। मेरा किसी भी संगठन से कोई व्यक्तिगत विरोध नहीं है यदि संघ का मुझे विरोध ही करना होता तो शायद मैं कांग्रेस या कोई अन्य पार्टी जॉइन करता।

Pratik said...

बहुत बढिया लिखा है भुवनेश भाई, पढ़कर मज़ा आ गया। क़रारा व्यंग्य है। आपकी बात पर मेरे दिमाग़ में भी ख़्यालात घुमड़ने लगे हैं। लिखता हूँ।

Reetesh Gupta said...

बढ़िया लिखा है भइये ।

रीतेश गुप्ता

mahashakti said...

आपने जो कुछ लिखा है मैने कहां कहा कि गलत लिखा है, मैने तो बस यही कहा कि जो सरकार आती है अपनी नीतियां चालाती है, ये बसत तो सच है कि अच्‍छाईयो के बीच जो बुराईयो पर तीखा व्‍यंगात्‍मक प्रहार किया है, मै उसका समर्थन करता हूं। पर अच्‍छाईयो को भी नजर अन्‍दाज नही कर सकता है। अच्‍छा लिखते है लिखते रहिये :-)