Wednesday, March 18, 2009

भड़काऊ कौन है अब ये एनडीटीवी से पूछना पड़ेगा ?

वरुण गांधी आजकल खिसियाहट में अपने कहे से पल्‍ला झाड़ते नजर आ रहे हैं, बातों से ज्‍यादा खिसियाहट उनके चेहरे पर नजर आती है। उनके बारे में ज्‍यादा कहने की जरूरत नहीं है सिवाय इसके कि उनका ना तो भारतीय राजनीति और बीजेपी में ही कोई वजूद है और ना ही उन्‍हें बात करने तक की समझ है। बेचारे पहले चुनाव के समय जोश में आकर-उल्‍टा सीधा कह गये तो ना तो अब निगलते बन रहा है और ना उगलते, ऐसे नादान बालक अपनी लुटिया खुद ही डुबोते हैं...यदि वे जीत भी जाएं तो भी बीजेपी में उन्‍हें कोई घास डालने से रहा। सबसे बड़ी बात है उनके भीतर भरी कुंठा, यदि उनके पिता जीवित होते तो शायद वे भारतीय राजनीति के दैदीप्‍यमान नक्षत्र व युवराज जैसे संबोधनों से नवाजे जा रहे होते...पर हाय रे किस्‍मत! ऐसा कुंठित व्‍यक्ति यदि खुद के वजूद का अहसास कराने के लिए कुछ उल्‍टा-सीधा कर बैठता है तो इसमें बेचारे का क्‍या दोष। कुंठा से भरा हर व्‍यक्ति ऐसे ही ऊटपटांग हरकत करते पाया जाता है।

खैर आज रात एनडीटीवी के न्‍यूज पॉइंट पर मुख्‍य मुद्दा यही था....बेचारे की लंगोटी को पकड़े हुए थे चैनल वाले। वैसे भी हिंदूविरोध और खासकर बीजेपी विरोध का ठेका उन्‍होंने ले ही रखा है....बेचारे कम्‍युनिस्‍टों की मजबूरी भी है वे खाते ही इसका हैं....बाकी इसके लिए पैसा पाकिस्‍तान से आये या किसी खाड़ी देश से उन्‍हें सब मंजूर है।
चैनल के एंकर ने वरुण गांधी के बहाने एक तरफ से लपेटना शुरू किया पहले वरुण के बहाने बीजेपी की छीछालेदर शुरू की फिर बाबरी मस्जिद जैसे महान स्‍मारक के शहीद होने पे टसुए बहाए गए, फिर कल्‍याण सिंह और बाल ठाकरे को जी भरकर कोसा गया। कुल मिलाकर चुनावी मौसम में एनडीटीवी वाले जी-जान से जुटे हैं कि बीजेपी को एक भड़काऊ, फासीवादी, गंगा-जमुनी संस्‍कृति विरोधी और अंतत: चूंकि हमारा चरित्र सेक्‍युलर है इसलिए राष्‍ट्रविरोधी होने तक का सर्टिफिकेट दे दिया जाए।

ये चांडाल कंपनी बहुत सामाजिक सरोकारों और पत्रकारिता के ऊंचे आदर्शों की बात करती है पर अब चुनाव का मौसम है तो ये सब बातें छोड़कर केवल एक खास पार्टी के खिलाफ प्रोपेगैंडा चालू है। इसके लिए अलग से इन्‍हें चुनावी बजट भी मिला होगा।

कांग्रेस ने पिछले 5 साल में अपने कितने चेले-चपाटे राष्‍ट्रीय रोजगार गारंटी योजना के जरिए लखपति-करोड़पति बना दिए इसका इनके पास कोई हिसाब किताब नहीं। उल्‍टा इनके चहेते कारत तो इस योजना को बहुत सफल मानते हैं। पिछले बीजेपी के शासन के मुकाबले इस शासन में आधारभूत-संरचना व निर्माण कार्यों पर कितना काम हुआ। सेना के आधुनिकीकरण के जो दावे किये जाते रहे वो कहां गये। कांग्रेस का हाथ आम आदमी के साथ का दावा करने वाले राहुल बाबा को आम आदमी की समझ कितनी है.....राष्‍ट्रीय मुद्दों और राष्‍ट्रीय समस्‍याओं को वो कितना समझते हैं सिवाय अपने सुनियोजित स्‍टंटों के।

इन सब बातों के बजाय पूरा ध्‍यान इस बात पर दिया जा रहा है कि नरेंद्र मोदी कितना बड़ा शैतान है....और यदि गलती से कहीं बीजेपी सत्‍ता में आ गई तो ईराक में सद्दाम हुसैन के शासनकाल से भी भयंकर कत्‍लेआम शुरू हो जाएगा....कल्‍याण सिंह के पुराने वीडियो बार-बार दिखाये जा रहे हैं और उस बहाने बीजेपी को गरियाया जा रहा है......एक साध्‍वी जिसके खिलाफ अभी तक आरोप साबित नहीं हुए और मामला चल रहा है उसका बहाना लेकर हिंदुओं को आतंकवादी होने का सर्टिफिकेट ये पहले दे ही चुके हैं....बाकी सोहराबुद्दीन जैसों के लिए भारतीय न्‍याय-व्‍यवस्‍था तक को गरिया सकते हैं....हिंदू तालिबानों से किसी भी तरह कम नहीं ऐसा भी ये एक परम मूर्ख और घटिया आदमी प्रमोद मुथालिक का उदाहरण देकर साबित कर ही चुके हैं.....

बाकी सेक्‍युलर और कम्‍युनिस्‍टों के लिए सब जायज है.....चाहे यासीन मलिक जैसे आतंकवादी खुलेआम मीडिया पर तकरीर करते पाये जाते हैं अभिव्‍यक्ति की स्‍वतंत्रता के नाम पर.......पर बेचारे जम्‍मू के हिंदुओं के हितों के बारे में चर्चा करने की फुर्सत इन्‍हें आज तक नहीं मिली.....इनके चहेते कम्‍युनिस्‍ट रोजाना अनगिनत बांग्‍लादेशियों को सीमापार करवाकर उनके राशनकार्ड बनवाते हों....फिर भी रवीश कुमार जैसे महान पत्रकार टीवी पर इसी चिंता में घुले हुए नजर आते हैं कि पाकिस्‍तानी कलाकारों को हिंदुस्‍तान में क्‍यों कुछ लोग भला बुरा कहते हैं...और लगे हाथ इसके खिलाफ बीजेपी और संघ परिवार जैसे तालिबानी(?) संगठनों की भूमिका भी बतला देते हैं.....ये महान सेक्‍युलरता के झंडाबरदार लालू के समय में हुए दंगों और पासवान के बांग्‍लादेशियों के प्रति प्रेम को भूल जाते हैं क्‍योंकि वे सेक्‍युलर हैं.....असम में बांग्‍लादेशियों का हरा झंडा फहराना तक इन्‍हें मंजूर है... पर मकबूल फिदा हुसैन की प्रदर्शनी में हुए छुटपुट बवाल के खिलाफ वृंदा करात जैसी महान नेत्रियां इनके कैमरे के सामने चिल्‍लाने लगती हैं।

भाईयों एक दिन किसी हिंदू के मंदिर जाने या तिलक लगाने और जन्‍माष्‍टमी मनाने को भी सांप्रदायिक करार दे दिया जाएगा। वैसे भी वंदे मातरम और भारत माता की जय बोलने को तो सांप्रदायिक करार दिया ही जा चुका है......किसी को भी खुद को भारतीय होने से पहले खुद को सेक्‍युलर साबित करना होगा तभी वह इस देश में रह सकेगा.....और सेक्‍युलरिज्‍म के सर्टिफिकेट के लिए आपको रवीश कुमार, बरखा दत्‍त एण्‍ड कंपनी की शरण में जाना होगा.....बाकी यदि आप जालीदार टोपी पहनते हैं, दाड़ी बढ़ाकर रखते हैं और हिंदू आतंकवाद की बात करते हैं तो आपका काम बिना सर्टिफिकेट के भी चल जाएगा :)

चलूं मैं भी सेक्‍युलर होने का सर्टिफिकेट ले लूं......खुदा हाफिज :)

11 comments:

Anonymous said...

पहले तो तुम खुद के भीतर झांको. जानते हो अब तक भाजपा को नीचा क्यों देखना पड़ता है? क्योंकि उसके लोग आपस में ही लड़ते हैं. हिन्दू मानसिकता बन गई है.

अगर किसी मुस्लिम ने कहा होता कि हम अपने पर उठने वाले हाथ काट देंगे तो सारे मुसलमानों ने ताली ठोंकी होती एक स्वर में, और तुम बच्चा नादान कहकर अपने ही लोगों के हाथ कमजोर करने में लगे रहो.

तुमहारे अंदर जोश है, लेकिन तुम बंट जाओगे तो कोई भी तुम्हें छील देगा.

सबसे पहले जो सच है, उसका साथ देना सीखो.

वरुण गांधी ने कुछ भी गलत नहीं कहा, वो रिकार्डिंग सुनो.

भाजपा या राजनीति में वजूद हो न हो, हर राष्ट्रप्रेमी को यह कहने का हक है कि वो अपने राष्ट्र या समाज को नष्ट करने के लिये उठने वाले हाथ काट देगा.

और तुम्हारा हमारा कर्तव्य है साथ देना उस आवाज का

कभी इस बारे में सोचो

sareetha said...

आप तो वरुण गाँधी को इस तरह कुँठित साबित करने पर तुले हैं मानो सोनिया और राहुल गाँधी से ज़्यादा धन आपका ही दबाया है उन्होंने । जब अपनी विफ़लता पर राहुल कुँठित नहीं,तो ऎसे में आत्मविश्वास से लबरेज़ इस नौजवान को क्यों कर कुँठा होगी । वैसे आप खुद ही दिशाहीन से नज़र आते हैं । कभी भाजपा को कोसते ,कभी वामपंथ को गरियाते ,तो कहीं एनडीटीवी के खिलाफ़ लट्ठ लेकर घूमते नज़र आते हैं । कुल मिलाकर आपका विश्लेषण कहीं नहीं पहुँचता । चूँ -चूँ का मुरब्बा अच्छा है ।

Anonymous said...

सचमुच ये एक चांडाल (साथ में दलाल) कंपनी ही है.सबसे मजेदार बात तो यह है की यहाँ कुछ बूढे दलाल तो पहले से ही थे जिनको लगता था की दुनिया वो ही चलते है, अब तो लगता है की वहा की दरो दिवार को भी लगता होगा की पूरी दुनिया उसी के ऊपर टिकी हुई है.

Pratik Pandey said...

अब एनडीटीवी पर बेवजह ही आप नाराज़ हो रहे हैं। यह कोई पहली बार थोड़े ही है कि उन्होंने ऐसी बात कही हो। हाल में एनडीटीवी 24x7 पर बाबरी मस्जिद के ऊपर एक डॉक्यूमेंट्री आ रही थी। उसमें भगवान राम को जी भरकर कोसा गया। कहा गया सीता का त्याग करने वाला भगवान नहीं हो सकता।

तो भैया हम कहते हैं कि हिन्दू धर्म के देवी-देवताओं को जी भरकर कोसो, उसमें कोई बुराई नहीं है। लेकिन तथाकथित बुद्धिजीवियों, आप दूसरे धर्मों पर भी ज़रा नज़र डालकर अपनी बुद्धिमत्तापूर्ण व्याख्या दो। जिस दिलेरी से हिन्दुत्व की आलोचना करते हो, उसी बहादुरी से ज़रा इस्लाम और ईसाईयत की आलोचना भी करो। हम तो बस इतना ही चाहते हैं। लेकिन न... सेकुलरिज़्म माने सिर्फ़ हिन्दुत्व को गरियाना।

तो सेकुलर भाईयों से मेरी अपील है वे हिन्दुत्व को गरियाना इसी शिद्दत से जारी रखें। लेकिन हो सके तो साथ ही बाक़ियों को भी अपनी जद में लें। और अगर न हो सके तो जो अभी कर रहे हैं वो ही जारी रखें, क्योंकि उनकी सुनता भी कौन है!!!

राम त्यागी said...

अगर कुछ ही शब्दों में बोला जाये तो भारत का कोई भी राजनीतिक दल हो या मीडिया वाले सब अपने अपने स्वार्थ में लगे हैं और इसलिए ही उनका हर कदम उनके निहित लाभ से प्रेरित होता है. देश प्रेम या देश की समस्याओं से इनका कोई सारोकार नहीं है.
अब अगर वरुण ऐसी उत्तेजक बातें न बोलता तो क्या उसको मीडिया में इतना स्थान मिलाता ?
नरेन्द्र तोमर जो म.प्र. में बीजेपी के अध्यक्ष महोदय है, बहुत ही बेकार आदमी है वो, में अपने एक महीने के भारत प्रवास में एन नेताओ ..चाहे किसी भी दल के हो ..का भयावह रूप देखकर परेशान था. हर लेवल पर भ्रष्टाचार है. हर कोई पागल पैसा कमाने के लिए. अभी मेरे घर पर होली मिलन समारोह में एक दोस्त आये , उनका विचार था की भारत में लोग बहुत दुखी है और इसलिए इसे काम करके अपने लिए कोई न कोई सुखी होने का तरीका देख लेते है. पता नहीं क्या होगा इस महान देश का जहा पर चपराशी से लेकर बड़े स्तर के लोग हर जगह पैसा बनाने में और सरकार को चूना लगाने में लगे है. में आपके लेख से पूरी तरह सहमत हूँ और मेरे को वरुण नहीं, दीनदयाल उपाध्याय जैसे लोग चाहिए, राहुल नहीं राम मनोहर लोहिया जैसे नेता चाहिए.
इस देश को हमारे लेख के साथ साथ हमारी भी जरूरत है, खून खौल रहा है की चलो कुछ करें. ......

संजय बेंगाणी said...

भगवान इन टीवी वालों को और चिल्लाने की शक्ति दे, ताकि हिन्दू और मजबूती से एक हो सके.

Suresh Chiplunkar said...

सरिता जी, लेख में भाजपा को कहाँ पर कोसा गया है, मुझे तो समझ में नहीं आया… रही बात NDTV की, तो क्या आपको अब भी शक है कि यह चैनल हिन्दू (भाजपा-संघ) विरोधी नहीं है? भाजपा की सबसे बड़ी गलती कहें या कमी कहें कि उसने मीडिया रूपी "भेड़ियों" के सामने "उचित कीमत के टुकड़े" नहीं डाले… प्रमोद महाजन जब तक जीवित थे तब तक वे मीडिया को बड़ी सही तरीके से "मैनेज" करते रहे, और चैनल-अखबार मालिकों का "खयाल" रखते रहे…। हिन्दू हित की बात करने पर तो अखबारों-चैनलों को एक ही पार्टी से पैसा मिलेगा, जबकि "सेक्यूलर" बातें करने से कई पार्टियों से पैसा खाने को मिल जाता है, ऐसे में अधिकतर चैनल-अखबार हिन्दू विरोधी हों तो आश्चर्य कैसा? सभी पत्रकारों(?) से अनुरोध है कि आजम खान, अबू आजमी, यासीन मलिक जैसों के भारत विरोधी (हिन्दू विरोधी नहीं) बयानों के फ़ुटेज देख लें…

Malaya said...

इन कुत्तों को भूँकने दीजिए। हिन्दू मन को जितना इन बिकाऊ पत्रकारों ने आहत किया है उसका जवाब यह जरूर देगा। मीडिया के शैतान जिस प्रकार इस्लामी कट्टरपन्थ का परोक्ष समर्थन कर रहे हैं वह इनको भी नंगा कर रहा है। जनता सब समझती है। गुजरात में मोदी के खिलाफ़ जो जहर उगला गया उसका असर कितना हुआ, यह सभी जानते हैं।

वरुण को इतना कच्चा मत समझिए। गान्धी खानदान में सबसे कुशल वक्ता वही है। बाकी सब तो बैसाखी वाले हैं। यह अपने दिमाग से बोलता है और सच्ची बात बोलता है। इसका समर्थन किया जाना चाहिए।

ज्ञानदत्त । GD Pandey said...

वरुण बढ़िया गोटी खेल रहे हैं!

SHAILESH said...

बिलकुल सही लिखा है भुवनेश जी आपने .....
ndtv घटिया पत्रकारिता का पर्याय बन चुका है ....

pandit visnugupta said...

"jwala uthi sastragni ki
jhulash uyhe sansaar
mahakaal hai kholata
mahasamar ke dwar"

maha yudh ki taiyaaria karo mitra
kyoki smay pass main hi hai.......