Wednesday, July 29, 2009

आईये पाक में बढ़ते आतंक के लिए माफी मांगे

मुंबई हमलों के बाद जब दिल्‍ली में बैठे गीदड़ों में भभकी देने का कंपटीशन चला तब ऐसा लगा कि वाकई कुछ हो लेगा. अब तो अमेरिका भी साथ है और सबूत भी और उधर यूएन को भी समझाके पाक की कर देंगे ऐसी-तैसी. पर हाय रे किस्‍मत ! ...क्‍या कहें जैसी किस्‍मत हमारे पडौसियों ने पाई उसका जवाब नहीं. गीदड़ कुर्सी पे यहां बैठते हैं और पूंछ उनके निजाम के सामने हिलाते हैं. वाह जी वाह....इसे ही तो कहते हैं अंधे के हाथ बटेर नहीं बतख लगना....वरना कोई बेवकूफ थोड़े ही खामखा मिस्र के बियावान में जाकर अपनी नाक काटकर पेश करेगा, ऐसी बहादुरी तो कोई महान स्‍कॉलर ही कर सकता है जिसकी विद्वत्‍ता और मैनेजमेंट की चर्चा लोग-बाग ऐसे बयान करते हैं जैसे उसने गद्दी पर बैठकर इस मुल्‍क पर अहसान कर दिया हो....दाल बेशक नब्‍बे रुपये हो फर्क नहीं पड़ता, भई दाल महंगी है तो पनीर खाओ, रोटी महंगी है तो ब्रेड खाओ...खामखा यहां का अवाम चुपचाप ऐसे विद्वान से शासित होने के बजाय हल्‍ला मचाता है.
मेरा अनुरोध उक्‍त विद्वान महोदय से सिर्फ इतना है कि यदि उन्‍हें हमारे पडौसियों के दुखदर्द की इतनी ही चिंता है तो क्‍यों नहीं उनके यहां आतंकवाद,दुखदर्द, गरीबी, भुखमरी मिटाने को एक पैकेज की घोषणा कर देते....भुखमरी दूर हो ना हो, कम से कम कुछ समय के लिए वे उससे असलहा वगैरह खरीदकर खुद की भारतीयों से रक्षा ही कर लेंगे आखिर हमने उनकी नाक में दम जो कर रखा है....मुझे पक्‍का विश्‍वास है कि आदरणीय उक्‍त मसले पर अगली कैबिनेट और पार्टी मीटिंग में जरूर विचार करेंगे और यदि उनके पास वाकई एक इंसान का दिल है तो एक सताये हुए राष्‍ट्र से क्षमा मांगने तक में वे पीछे नहीं हटेंगे.

ऐसी महान आत्‍मा को मेरा कोटि-कोटि नमन !

2 comments:

ज्ञानदत्त पाण्डेय | Gyandutt Pandey said...

चलिये आज ही खरीदते हैं पचास ग्राम पनीर और पनीली पनीर की सब्जी के साथ करते हैं महान आत्मा को नमन!

indianrj said...

आपका ब्लॉग बहुत दिलचस्प लगा खासतौर से आपका व्यंग्य और हास्य का मिश्रण.