Saturday, May 07, 2011

शहीद ओसामा...कारवां बढ़ रहा है दिग्विजय का...जय हो

दिग्विजय सिंह की ओसामा के बारे में बयानबाजी के बाद से जो कुछ हुआ उसके बारे में भास्‍कर का कहना है-

गौरतलब है कि इस पूरे मुद्दे को सबसे पहले कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह द्वारा हवा दी गई थी।

बाकी खबर यहां पर है-

शुक्र है दिग्‍गी अब हमारे मुख्‍यमंत्री नहीं रहे नहीं तो प्रदेशभर में शोक घोषित करवाते.......

Tuesday, May 03, 2011

मुल्‍ला दिग्विजय अब ओसामा पर चादर कैसे चढ़ाएंगे ?


दुनिया भर में भले जश्‍न हो रहे हों पर दूसरी तरफ ओसामा बिन लादेन के मारे जाने के बाद उनके समर्थकों में शोक की लहर व्‍याप्‍त है...

हिंदुस्‍तान में उनके सबसे बड़े समर्थक और कांग्रेस पार्टी के महासचिव और सबसे बढ़कर हिंदुस्‍तान के भावी युवराज के खासमखास दिग्‍गी ओसामा को ओसामा संबोधित करने-भर से खफा हैं, उनका कहना है कि उनके प्‍यारे 'ओसामाजी' के साथ अमेरिका ने अच्‍छा नहीं किया और नाहक ही उसे मारकर पानी में डुबो दिया....वैसे भी उनके अनुसार ये तय करने का हक अम‍ेरिका या किसी को नहीं है कि ओसामा दुनिया का एक खूंखार आतंकवादी था....हो सकता है ये हिंदूवादी ताकतों का दुष्‍प्रचार हो सकता है कि अमेरिका पर हमले में 'ओसामाजी' का हाथ था....हां उसके बदले में यदि अमेरिका भगवा आतंकवाद से निपटने का कोई काम करता तो कम से कम इस दुनिया को सुरक्षित और आतंकरहित बनाने की दिशा में कुछ हो सकता था...पर हाय रे सीआईए इसको ये भी नजर नहीं आता कि असली आतंकी कहां छुपे बैठे हैं...

दिग्विजय, जो कि एक बहुत छोटी-सी जगह का एक छुटभैया नेता हुआ करता था और जो मध्‍यप्रदेश के दुर्भाग्‍य से उसका दो बार मुख्‍यमंत्री रह चुका है अब कांग्रेस पार्टी की अल्‍पसंख्‍यक पॉलिटिक्‍स का अगुवा बनने तुला हुआ है, बिहार को पंद्रह-साल में आदिम-युग में पहुंचा देने वाले लालू को वहां की जनता फिर भी स्‍वीकार कर सकती है...परंतु यदि आगामी विधानसभी चुनाव में दिग्‍गी प्रदेश में वापस आ गया तो 10 साल में मध्‍यप्रदेश को पूरी तरह बर्बाद कर देने वाले दिग्‍गी से नाराज यहां की जनता तीसरी बार भी शिवराज सिंह को ही मुख्‍यमंत्री बनायेगी....लोग कहते हैं कि अपशब्‍दों का प्रयोग करना हो, किसी को बुरा-भला कहना हो, किसी भद्र व्‍यक्ति पर लांछन लगाना हो तो इटैलियन मैडम इसी को आगे कर देती है....लोग नाहक की बदनाम करते हैं मैडम को कि उन्‍हीं की शह पर उनका ये सिपाही आग उगलता है....पर त्‍याग की जीवंत मूर्ति और हिंदुस्‍तान के भावी युवराज की मां, इस हिसाब से तो उन्‍हें राजमाता का संबोधन भी मिलना चाहिए, को इस प्रकार से लांछित करने वाले लोग और खासकर हिंदू लोग ये भूल जाते हैं कि उन्‍हीं की वजह से मैडम की सरकार की कितनी किरकिरी होती है और देश को आतंकवाद का दंश झेलना पड़ता है और उनकी सरकार को बुरा-भला कहा जाता है....

पर भला हो दिग्विजय का जिनके कारण हमको आंखें खोलने की वजह मिलती है कि मुंबई हमलों में मारे गए पुलिस अधिकारियों को बेचारे और मासूम कसाब ने नहीं मारा था...हालांकि अभी वे खोजबीन में जुटे हैं शायद आगे इस तरह के तथ्‍य भी सामने आएं कि कसाब का असली नाम केशव है और वो मासूम तो गलती से आतंकवाद और बम बनाने की ट्रेनिंग देने वाले हिंदू संगठनों से जुड़ गया वरना असल में वो तो एक मोहरा है जिसे जबरदस्‍ती बंदूक पकड़ा दी गई थी...और पूरी कार्यवाही को हिंदूस्‍तान में ही कहीं बैठे उसके आका लाइव देख रहे थे...

फिलहाल तो दिग्विजय सोच रहे होंगे कि पाकिस्‍तान में न सही भारत में ही सही....उनके प्‍यारे ओसामाजी की कोई मजार होती तो शायद वे उसके उर्स में चादर चढ़ाकर करके अपनी धार्मिक प्रतिबद्धताओं को तो निभा पाते.....एक बेचारे धार्मिक व्‍यक्ति को इस भगवा देश में ये भी नसीब नहीं...

Sunday, May 01, 2011

Will Julion Assange name Moneymohan again? क्‍या स्विस बैंक खुलासों में मनमोहन का नाम आयेगा ?

जूलियन असांजे महोदय ने घोषणा की है कि वे जल्‍द ही स्विसबैंक खाताधारी भारतीयों का नाम उजागर करने वाले हैं...विगत समय में उन्‍होंने मनमोहन सिंह पर तीखे हमले किये हैं और आगे भी कर सकते हैं...
परंतु जब उन्‍होंने घोषणा कर ही दी है तो क्‍या वे मनमोहन सिंह का नाम भी लेंगे...मैं इस बारे में अनुमान लगाता हूं तो लगता है कि मनमोहन अवश्‍य ही उस लिस्‍ट में नहीं होंगे...पर शायद उनकी सरकार में शामिल अन्‍य लोग जरूर मेरिट में होंगे......जिनमें से एक उस शख्‍स का नाम लिया जा रहा है जिन पर अन्‍ना ने अपना गुस्‍सा निकाला था...इस बारे मे जरूर संशय लगता है कि जूलियन ऐसा खुलासा करेंगे या नहीं

हालांकि लोग भी मनमोहन को मनीमोहन और भ्रष्‍टों का सरदार कहने से नहीं चूक रहे हैं....और सीबीआई का बड़े नामों पर शिकंजा कसना भी उनके लिए राहत की बात साबित नहीं हो रही है...

जूलियन महोदय ने बताया था कि स्विस बैंक में खाता खोलने के लिए 10 लाख डॉलर की जरूरत होती है यानी लगभग साढ़े चार करोड़ रुपये....वैसे देखा जाए तो ये एक बहुत बड़ी रकम है...पर दूसरी तरफ एक वर्ग के लिए ये एक काफी छोटी रकम है...कम से कम भारतीय लोकतंत्र के मंदिर संसद में बैठने वालों के लिए तो...और यदि ये लोग चाहें तो मिलकर स्विस बैंक एसोसिएशन से भी धनी एसोसिएशन का गठन कर सकते हैं...

अभी थोड़ी देर पहले ही इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा AIEEE का पर्चा लीक हुआ है....पुदुच्‍चेरी के उपराज्‍यपाल पद पर बैठे व्‍यक्तियों से पूछताछ हो रही है...इधर मीडिया भ्रष्‍टाचार के खिलाफ शंखनाद पर मीडिया का आक्रामक रुख कायम है जबकि बहुत से मीडिया हाउसेस में लगा पैसा कहां से आ रहा है इसकी तह में भी जाना जरूरी जान पड़ता है....

जूलियन असांजे किसी का नाम लें या ना लें...काला धन स्विस बैंक जाये या इटली या कहीं और...फिलहाल तो बस धूमिल की यही पंक्तियां याद आ रही हैं-

हर तरफ धुआं है
हर तरफ कुहासा है......