कल मीडिया विमर्श(पत्रकारिता पर त्रैमासिक पत्रिका) में जयप्रकाश मानसजी का हिन्दी चिट्ठाकारी पर लेख पढ़ा। 'मीडिया विमर्श' के पिछले अंक में भी अन्तर्जाल पर हिन्दी की उपस्थिति के बारे में विस्तारपूर्वक लेख दिया गया था। मानसजी ने बहुत ही अच्छे ढंग से एक आम पाठक और इंटरनेट प्रयोगकर्ता के लिए हिन्दी में चिट्ठालेखन के बारे में जानकारी दी है जिसके लिए उन्हें हार्दिक धन्यवाद।
आजकल जिस प्रकार से अन्तर्जाल पर हिन्दी शब्दों के प्रवाह की गति में तीव्रता आई है उस अनुपात में लोगों तक इसकी जानकारी नहीं पहुँच रही है। आज भी अधिकांश लोग इंटरनेट प्रयोग के लिए अंग्रेजी के ज्ञान को एक आवश्यक तत्व मानते हैं। उदाहरणार्थ मैं कभी-कभार जब अपने मुहल्ले के सायबर कैफ़े में जाता हूँ और हिन्दी चिट्ठे और हिन्दी साइट्स खोलता हूँ तो अधिकांश उपस्थित मेरे मित्र आदि कौतूहल से देखते हैं। कारण यह है कि लोगों को पता ही नहीं है कि इंटरनेट पर हिन्दी में बी.बी.सी हिन्दी और वेबदुनिया आदि के अलावा भी प्रचुर सामग्री उपलब्ध है। और जब मैं किसी ऑनलाइन टूल का प्रयोग कर जब कोई पोस्ट लिखने बैठता हूं तो अक्सर लोग समझते हैं कि ये बंदा कोई बहुत बड़ा तकनीकी महारथी है जो अपना लिखा इंटरनेट पर डाल देता है। हालाँकि जो लोग काफ़ी समय से इंटरनेट प्रयोग कर रहे हैं और थोड़ा तकनीकी ज्ञान भी रखते हैं उन्हें इसकी जानकारी अवश्य होगी। परंतु फ़िर भी एक आम इंटरनेट प्रयोगकर्ता के लिए हिन्दी चिट्ठाकारी अजूबा ही है। हालाँकि मैं अक्सर अपने परिचितों को इस बावत् जानकारी देता रहता हूँ। साथ ही ऑरकुट पर भी लोग अक्सर मेरा हिन्दी साहित्य से संबंधित समूह और प्रोफ़ाइल देखकर हिन्दी चिट्ठाकारी के बारे में जानकारी लेने आते रहते हैं।
परंतु मानसजी का लेख पढ़ने के बाद खयाल आया कि क्यों न हिन्दी समाचार-पत्रों और पत्रिकाओं के माध्यम से लोगों को हिन्दी चिट्ठाकारी और अन्तर्जाल पर हिन्दी की उपस्थिति के बारे में अवगत कराया जाये। प्रतीक पांडेजी ने बताया कि वे भी पहले 'हरिभूमि' में इस प्रकार का लेख लिख चुके हैं। तो मैंने सोचा कि क्यों न अपने इस विचार से सभी चिट्ठाकारों को अवगत कराया जाये जिससे वे सब भी अपने-अपने क्षेत्रों के समाचार माध्यमों के द्वारा लोगों तक इस जानकारी को पहुँचायें।
समाचार-पत्रों और पत्रिकाओं के माध्यम से हिन्दी चिट्ठाकारी की इस विधा को आसानी से आम इंटरनेट प्रयोगकर्ता और पाठक तक पहुँचाया जा सकता है और किसी प्रकार का कोई खर्चा आदि भी नहीं। हिन्दी में पाठकों की अपनी भाषा में दी गई जानकारी से आम पाठक भी जो इंटरनेट प्रयोग करते हैं उनमें इसके बारे में अवश्य ही उत्सुकता जाग्रत होगी कि आखिर हिन्दी में इंटरनेट पर किस प्रकार की गतिविधियाँ चल रही है। और वे सरल-सहज भाषा में इंटरनेट पर हिन्दी के प्रयोग और हिन्दी चिट्ठाकारी के बारे में जान सकेंगे जिससे कि वे अब तक अनजान थे।
यहाँ सबसे महत्वपूर्ण बात है कि कई अच्छे लेखक और स्वयं की अभिव्यक्ति को माध्यम की कमी के कारण दूसरों तक न पहुँचा सकने वाले भी चिट्ठा-लेखन के बारे में जानकर इसका लाभ उठा सकेंगे। और बेशक इससे हमारा हिन्दी चिट्ठा-जगत तो समृद्ध होगा ही।
इसलिए 'मेरा सभी चिट्ठाकारों से आग्रह है' कि वे अपने-अपने स्तर पर जहाँ तक संभव हो समाचार-पत्रों और पत्रिकाओं में हिन्दी चिट्ठाकारी और इंटरनेट पर हिन्दी की जानकारी हेतु कुछ न कुछ लिखें। साथ ही कुछ प्रमुख चिट्ठों और संजालों जैसे नारद,अक्षरग्राम,फ़ुरसतिया,रचनाकार,मेरा पन्ना,मेरा हिन्दी चिट्ठा आदि के बारे में भी बतायें और यथासंभव कुछ लिंक भी दें। इस प्रकार से लोगों को हिन्दी चिट्ठा लेखन के बारे में जानने में मदद मिलेगी और दी गई लिंक्स के माध्यम से वे चिट्ठा-जगत से सीधे जुड़ सकेंगे।