कुछ समय पहले हमने जोर-शोर से घोषणा की कि अब तो हमारा नाम ब्लाग-जगत में नियमित लेखकों में शुमार होकर रहेगा। पर हाय रे किस्मत! हमारी बिजली मैया को ये घोषणा रास न आई। तब से लेकर आज तक बिजली हमें ठेंगा दिखा रही है कि लो बेट्टा कल्लो ब्लागिंग। बिजली मैया पहले भी अंतर्धान होती थी पर इस बार से कुछ ऐसा संयोग बना कि जब भी कुछ लिखने का आइडिया दिमाग में आया बिजली गुल। लगता है हमारे दिमाग और बिजलीघर के फ्यूज वायर का कुछ संबंध है तभी तो इधर कुछ लिखने के बारे में दिमाग पर जोर डाला, उधर बिजली गुल। शायद ज्यादा लोड नहीं झेल पाता।
चंबल क्षेत्र में बारिश के मौसम में बाजरे की फसल बहुत होती है। पर हर साल की तरह इस बार भी बारिश कम हुई तो किसानों के मुंह लटक गए। पर हमें क्या ! हम न तो बाजरा उगाते हैं, न खाते हैं। हम क्या जानें किसानों का दर्द। पर जबसे बिजली मैया ने हमें तरसाना शुरू किया तब हमें जाकर किसानों का दर्द समझ में आया कि कैसे वो टकटकी लगाकर बादलों का इंतजार करते हैं। वैसे भी भारत में बिजली और मानसून में बहुत समानता है। किसान लोग फसल के लिए मानसून की बाट जोहते हैं और दूसरे शहरी लोग अपने रोजमर्रा के कामों के लिए बिजली की। वैसे आजकल हमारे प्रदेश की सत्ताधारी पार्टी भी अपने विकास कार्यों की ढपली बजाते हुए विकास शिविर लगाकर लोगों को बता रही है कि पिछले समय में प्रदेश में कितना धुंआधार विकास हुआ है। पर लोगों को उनकी बात समझ में ही नहीं आती उन्हें तो 24 घंटे बिजली चाहिए। चौबीस घंटे तो भैया सूर्य देव भी अपना प्रकाश नहीं देते फिर ये तो बिजली है।
हमारे दिमाग में यकायक एक खयाल आया कि क्यों न गुलजार साब को ही एक चिट्ठी लिख दें। सुना है हाल ही में उन्होंने माचिस की बजाय जिगरे से बीड़ी जलाने का तरीका ईजाद किया है। उसी तरह उनसे गुजारिश कर दें कि बिना बिजली के हिन्दी ब्लागर्स के लिए भी ब्लागिंग करने का कोई फार्मूला निकालें। वैसे भी उनका हिन्दी के विकास में बड़ा योगदान है। थोड़ा और सही। पर हमें इधर भारतीय डाक विभाग पर भरोसा नहीं रहा कि वो हमारी चिट्ठी पहुंचा ही देगा या लेटरबाक्स में पानी भरने से उसका राम नाम सत्त हो जाएगा। सो ब्लागर बंधुओं से भी गुजारिश है कि वे भी अपने स्तर पर प्रयास करके ये संदेश गुलजार साब तक पहुंचाएं।
खैर एकमात्र खुशी की बात यह है कि अभी-अभी हमारे निकटवर्ती शहर के ब्लागर मित्र प्रतीक पाण्डे की तरफ से एक सुझाव आया है। उन्होंने बड़ी नेक सलाह दी है कि जब भी कोई नया आइडिया दिमाग में कुलबुलाए उसे डायरी पर नोट कर लीजिए। फिर जब भी बिजली मैया की कृपा हो तो टुकड़ों-टुकड़ों में उसे टाइप कर डालिए और कर दीजिए पोस्ट। सो प्रतीक भाई की सलाह मानकर यह पोस्ट लिखी जा सकी है। इसलिए इसका श्रेय भी उन्हीं को दिया जाना चाहिए। हां, यदि गलती से आपको ये पोस्ट अच्छी लगे तो श्रेय अपुन को भी दिया जा सकता है।:)