Saturday, December 09, 2006

"सागर भाई को हँसाना है" -हास्य एवं मनोरंजन मंत्रालय से साभार

आजकल हमारे गिरिराज जोशीजी "कविराज" ने हमें एक महत्वपूर्ण कार्य सौंप रखा है। हुआ यूँ कि सागर नाहरजी ने मजाक-मजाक में उनसे कह दिया कि कभी-कभार कुछ हल्की-फ़ुल्की कवितायें भी लिखा कीजिए। वैसे भी आजकल हास्य-रस संबंधित रचनाओं का मौसम चल रहा है। हर टीवी चैनल पर हास्य कवियों का ही बोलबाला है। पर हमारे कविराज जरा चतुर किस्म के प्राणी हैं। उन्होंने सारे चिट्ठा जगत में मुनादी करवा दी है कि हास्य और मनोरंजन मंत्रालय भुवनेश शर्मा के पास है इसलिए सभी लोग, जो नाहरजी के समान गंभीर रचनाओं से त्रस्त हैं, वहीं संपर्क करें। वैसे मैं व्यंग्य मंत्रालय का प्रभार लेने के पक्ष में था पर देखा वहाँ कम्पटीशन कुछ ज्यादा है, सो मैंने कविराज से कहा भैया हास्य मंत्रालय का बोर्ड ही टाँग दो। वैसे भी ये मलाईदार मंत्रालय है। क्या पता कल को कोई टीवी चैनल वाला अपना चिट्ठा पढ़ ले और बैठे-बिठाये हस्ती का दर्जा मिल जाये। पर मैं स्टार वालों के आने के इंतजार में हूँ। सुना है कि वहाँ सिद्धू पाजी की सीट खाली हो गई है।

कविराजजी ने अपनी पोस्ट "सागर भाई को हँसाना है" में हमारी आपस की बातचीत उजागर कर दी और यह रहस्य सभी के सामने खुल गया कि हमारी रचनाएँ मौलिक न होकर कहीं से मारी हुई होती हैं। अब जब रहस्य खुल ही गया है कि जब सारी पोस्ट कहीं से चुरा के कापी-पेस्ट की गई हैं तो यह भी बताना पड़ेगा कि हमने यह महान कला कहाँ से सीखी।
आजकल जिसे देखो वो ऑरकुट देव का भक्त है। जरा समय मिला नहीं कि भग्वद्‍भक्ति में हो गए लीन। दूसरों के प्रोफ़ाइल देखना, "हाय", " "वाना बी फ़्रेंड" जैसे वाक्य दूसरों की स्क्रैपबुक में छोड़ना, पूजा-पाठ के सामान्य तरीके हैं। पर एक तरीका जिसको ऑरकुट पर कुछ विद्वान पंडित लोग प्रयोग करते हैं, वह है दूसरों की स्क्रैपबुक में झाँकना और उसमें से कुछ माल चुराकर तीसरे की स्क्रैपबुक में पेस्ट कर देना। ऐसे ही एक विद्वान पंडित हमारे मित्र हैं। एक दिन उन्होंने जब हमारा मूड कुछ उखड़ा देखा तो मानसिक शांति के लिए वे हमें ऑरकुट देव के मंदिर ले गए। मंदिर जाने में अपन को कुछ खास रुचि नहीं पर उन्होंने जब कुछ अप्सराओं से हमारी मित्रता कराई तो हमें इस मंदिर की सार्थकता का एहसास हुआ। उसके बाद हम भी करोडों भक्तों की तरह ऑरकुट देव की आराधना में लीन रहने लगे। एक दिन हमारे पंडितजी मंदिर में कुछ विशेष ढंग से पूजा-अर्चना करते दिखे। वे कुछ पंक्तियाँ एक भक्त की स्क्रैपबुक में से चुराकर कुछ अन्य भक्तजनों को पेस्ट रहे थे। पंक्तियाँ कुछ इस प्रकार थीं-

ऑरकुट बिना चैन कहाँ रे,
स्क्रैपिंग बिना चैन कहाँ रे,
सोना नहीं चाँदी नहीं,
ऑरकुट तो मिला,
अरे स्क्रैपिंग कर ले...

हमने पूछा पंडितजी इस विशेष पूजा का का कोई विशेष प्रयोजन है क्या? उन्होंने कहा- "अरे तुम भी बस दूसरों को स्क्रैप ही लिखना जानते हो। सही माल तो ये है। दूसरों की स्क्रैपबुक में से कापी करो और पेस्ट करो। खालीपीली लिखने के झंझट से मुक्ति और थोड़े टाइम में कई लोगों को भेजो। क्यों दिमाग पर जोर डालते हो।"
पंडितजी की बात हमारी समझ में आ गई। दिमाग पर जोर न डालते हुए दूसरों को इम्प्रेस करने का सस्ता और टिकाऊ तरीका मिल गया। तभी एक दिन दूसरों के प्रोफ़ाइल्स में झाँकते हुए हमे कविराज के दर्शन हो गए और हमारी उनसे मित्रता हो गई। उनके माध्यम से हमें चिट्ठाजगत के बारे में जानने का अवसर प्राप्त हुआ। कुछ ही दिन बाद कविराज ने हमें भी इस बहती गंगा में कुदा लिया, कहा- "आप भी चिट्ठा लिखें।" अब चूँकि लिखने का अपना कभी अनुभव नहीं रहा। नोट्स दूसरों के फ़ोटोकापी करवा के पढ़ते हैं। इम्तहान में उतना ही लिखते हैं जितने से पास हो जाएँ। ज्यादा लिखने से हाथ दुखता है न। सो हमने इस संबंध में सलाह लेने के लिए अपने पंडितजी को फ़ोन घुमाया।
पंडितजी को जब हमने चिट्ठा-लेखन नामक विधा के बारे में बताया तो वे हड़बड़ाते हुए हमारे घर आए और पसीना पोंछते हुए बोले- "दिखाओ तो यार क्या बताया था तुमने फ़ोन पे।"
हमने तुरंत उन्हें कविराज के चिट्ठे का दर्शन कराया और पूछा कि हमें चिट्ठा लेखन के बारे में कुछ टिप्स दीजिए। पंडितजी जो इंटरनेट के मामले में स्वयंभू पंडित थे इस नयी बला को देखकर सोच में पड़ गये। उन्होंने हमें कुछ दिन इंतजार करने को कहा। एक दिन पंडितजी ने हमें बुलाया और आशीर्वाद दिया कि आप निर्भय होकर चिट्ठा लेखन में कूदें। अब कोई समस्या नहीं है। हमने पूछा- "पर पंडितजी उसमें लिखेंगे क्या? हमें तो कुछ लिखना आता ही नहीं"
पंडितजी ने कहा- "कापी-पेस्ट करना तो याद है न कि भूल गये?"
हम- "पंडितजी इतनी अच्छी चीज को कोई भूलता है क्या?"
पंडितजी- "तो फ़िर ये लिंक लो और शुरू कर दो।"

पंडितजी ने बड़े अथक परिश्रम से कुछ ऐसे हिंदी चिट्ठों की लिंक दीं जो शौकिया तौर पर शुरू किये गये थे और शौक पूरा होने पर बंद पड़े हुए थे। हमने प्रसाद-स्वरूप वह लिंक ग्रहण कीं और उनका मैटर अपने चिट्ठे में चिपकाना शुरू कर दिया। उस दिन के बाद से आज तक यह क्रम अनवरत रूप से जारी है और आगे भी जारी रहता। पर इसी बीच हमें हास्य एवंमनोरंजन मंत्रालय का कार्यभार सँभालना पड़ गया। इसलिए आज का यह चिट्ठा मंत्रालय के एक कर्मचारी से लिखवाया गया है। और टिप्पणियों की संख्या के आधार पर उसकी वेतनवृद्धि करने की भी हमारी योजना है। इसलिए सागरजी से आग्रह है कि उस कर्मचारी के भविष्य को ध्यान में रखते हुए इतनी जोर का ठहाका लगायें कि उसकी गूँज आंध्र प्रदेश से मध्य प्रदेश तक हो।

साथ ही चिट्ठाकार बंधुओं के लिए खुशखबरी है कि हमारे मंत्रालय में शीघ्र ही नयी नियुक्तियाँ होने वाली हैं। इसलिए ऐसे उम्मीदवार जो स्वतंत्र रूप से अपने-अपने चिट्ठों में हास्य और मनोरंजन का इस्तेमाल करते हैं, हमसे संपर्क करें। यदि बाद में कोई चिट्ठाकार हास्य और मनोरंजन का प्रयोग अपने चिट्ठे में करता पाया गया तो मंत्रालय के विशेषाधिकार हनन के मामले में उस पर मुकदमा चलाया जायेगा। इसलिए अपने उज्जवल भविष्य को ध्यान में रखते हुए मंत्रालय में होने वाली नियुक्तियों के लिए संपर्क करें। नियुक्ति के लिए किसी प्रकार का कोई फ़ार्म आदि भरने संबंधी औपचारिकता नहीं रखी गई है। नियुक्तियों में पूरी पारदर्शिता बरती जायेगी। यदि आप मंत्रालय में नियुक्ति के इच्छुक हैं तो हमें बस एक मेल करें। आपको एक बैंक अकाउंट नंबर दिया जायेगा। वहाँ आपको मात्र साढ़े नौ लाख रुपये जमा करने होंगे। चिट्ठाकारों से इतर उम्मेदवारों के लिए रेट दस लाख है पर चिट्ठा-जगत से पुराने संबंधों को ध्यान में रखते हुए उनके लिए पचास हजार की विशेष छूट दी गई है। बैंक में पैसा जमा करने के पश्चात नियुक्ति-पत्र का इंतजार करने की कोई आवश्यकता नहीं है। सीधे आकर अपना स्थान ग्रहण करें।

5 comments:

संजय बेंगाणी said...

अच्छा है. लगे रहो.

गिरिराज जोशी said...

ऐसे ही सबको हँसाते रहियेगा, वरना "हास्य एवं मनोरंजन मंत्रालय" कभी भी छीना जा सकता है. बहुत चिट्ठाकारों की नज़र है इस पर. :)

सागर चन्द नाहर said...

अच्छा लगा, मुझे हँसाने के लिये आपका प्रयत्न :)
बस इसी तरह हँसाते रहिये।

सागर चन्द नाहर said...

वरना...........................

नीरज दीवान said...

सतर्कता विभाग को पता चला है कि इस मंत्रालय में भी उच्चस्तर तक भ्रष्टाचार फैल गया है. तुरंत ही अपनी ज़ेब से दो चार हल्के फुल्के हास्य-व्यंग्य ढीले करो वरना एक साल तक गंभीर रस की कविता की क़ैद में झोंक दिया जाएगा. या फिर ब्लॉगिनों की भारी कविताओं को दो साल तक झेलने और टीप लिखने की सज़ा भुगतनी होगी.

आदेशानुसार
भारतीय सतर्कता ब्यूरो