Wednesday, November 22, 2006

सायबर कैफ़े कैसे चलायें? How to Run a Cyber Cafe

कल रात गूगल चैट पर हैदराबाद निवासी सागरचन्द नाहरजी से मुलाकात हो गयी। उनका सायबर कैफ़े का व्यवसाय है। मैंने जब उनके सायबर कैफ़े के हालचाल के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि वहाँ सायबर ढाबों (कैफ़े) की संख्या में बढ़ोत्तरी होने से प्रतियोगिता बढ़ गयी है। इसी कारण से ग्राहकों की संख्या में भी गिरावट आई है। हमने सलाह दी कि प्रतियोगिता बढ़ने पर तो व्यवसाय का मजा ही अलग है, रोज दूसरे के ग्राहक तोड़ो और अपने में जोड़ो। नाहरजी का कहना था कि इस प्रतियोगी माहौल में टिके रहने के लिए उन्हें कुछ सलाह दी जाए। तो हमारे खुराफ़ाती दिमाग में ऑन--स्पॉट जो टिप्स आयीं वो हमने धड़ाधड़ टाइप कर दीं। नाहरजी को हमारे सुझाव पसंद गये साथ ही उन्होंने अनुरोध भी कर दिया कि इस बाबत्एक पोस्ट भी लिखी जाए, जिसमें विस्तार से सायबर कैफ़े को चलाने के बारे में कुछ सुझाव दिये जाएं। जिस प्रकार किसी कवि के मन में हमेशा एक चाह रहती है कि उसे कोई श्रोता मिले उसी तरह हमारे मन के किसी कोने में भी यह चाह दबी थी कि हमें भी कोई सलाह लेने वाला मिले। लोगों को मुफ़्त की सलाह बाँटने में जो आनंद प्राप्त होता है वही आनंद मैं भी इस पोस्ट को लिखते समय अनुभव कर रहा हूँ और अन्य चिट्ठाकार बंधुओं से भी अपनी टिप्पणियों के माध्यम से इस आनंद को प्राप्त करने का अनुरोध करता हूँ।

मेरे मष्तिष्क में इस समय जो सुझाव उमड़-घुमड़ रहे हैं उनका ब्यौरा मैं यहां क्रमवार ढंग से दे रहा हूँ-

- सबसे पहली सलाह है कि युवावर्ग, टीनेजर्स और छात्रवर्ग को आकर्षित करने की ओर अपना ध्यान केंद्रित करें। क्योंकि यही वर्ग सायबर ढाबों पे अधिकांशत: पाया जाता है।

- युवावर्ग में भी खासकर लड़कियों को अपने कैफ़े की ओर आकर्षित करने का प्रयास करें क्योंकि यदि लड़कियाँ अधिक आने लगेंगी तो ग्राहक संख्या में वृद्धि होना तय है। ( यह फ़ार्मूला मुहल्ले के एक कोचिंग मास्टर से चुराया गया है।)

- अब सवाल उठता है कि लड़कियों को आकर्षित कैसे किया जाए, यदि संभव हो तो काउंटर पे कोई सुंदर नौजवान बैठे जो लड़कियों से उनके मन मुताबिक मीठी-मीठी बातें करने में माहिर हो। साथ ही लड़कियों को इंटरनेट प्रयोग करते समय जरूरत पड़ने पर सहायता भी करता रहे।

- लड़कियाँ चैटिंग करते समय चॉकलेट, कुरकुरे आदि खाने की बड़ी शौकीन होती हैं तो यदि संभव हो तो बिक्री के लिए ऐसा ही कुछ सामान भी रख लिया जाए। और कभी-कभी उन्हें ये चीजें मुफ़्त में भी उपलब्ध करवायी जाएं।

- समय-समय पर कुछ विशेष रियायत योजनाएं भी चलाते रहें, जैसे दो घंटे बैठने पर एक घंटा फ़्री आदि और इस आशय की सूचना अपने कैफ़े के बाहर चिपकाएं।

- पी.सी. के डेस्कटॉप पर फ़िल्मी सितारों के वॉलपेपर लगाएं और देखें कि इस समय युवा वर्ग किसके पीछे पागल है। जैसे आजकल धूम- के ऐश, बिपाशा, रितिक और अभिषेक जैसे हॉट सितारों का वॉलपेपर लगा सकते हैं। क्रिकेट में यदि धोनी शतक मार रहा हो तो उसे लगाईये।

- विभिन्न त्यौहारों और अंग्रेजी दिवसों पर कुछ कुछ नया करते रहें। जैसे वेलेंटाइन डे के दिन कैफ़े पर पहले आने वाले कपल्स के लिए फ़्री सर्फ़िंग, या अपने प्रियजन के लिए फ़्री संदेश भेजें इत्यादि।

- कई हिंदू त्यौहार भी हैं जैसे रक्षाबंधन पर बहनों के लिए भाईयों से चैटिंग या संदेश भेजने में विशेष रियायत। कुछेक को फ़्री भी। अन्य त्यौहारों पर अपने प्रियजनों, रिश्तेदारों से चैटिंग करने पर ५०% की छूट जैसा कुछ।

- महीने में किसी दिन कैफ़े पर पहले आने वाले - ग्राहकों के लिए फ़्री सर्फ़िंग।

१०- बाल-दिवस जैसे मौकों पर बच्चों के लिए क्विज-कांटेस्ट का आयोजन जिसमें इंटरनेट और सायबर वर्ल्ड से संबंधित कुछ बहुत ही सरल से सवाल पूछे जाएं और प्रथम द्वितीय आदि आने वाले बच्चों को हफ़्ते भर फ़्री सर्फ़िंग सुविधा, कुछेक को सांत्वना पुरस्कार स्वरूप चॉकलेट आदि। बाल-दिवस के अलावा भी साल में किसी दिन ये आयोजन हो सकता है बच्चों की छुट्टियां चल रहीं हों जब।

११- साल में किसी दिन अपने कैफ़े की वर्षगांठ मना डालें और उस दिन अपने नियमित ग्राहकों को छोटी-मोटी ट्रीट दे डालें। ऐसा ही आयोजन नववर्ष पर भी हो सकता है।

१२- सभी युवा लोगों से मित्रवत व्यवहार रखें, बागवान फ़िल्म के परेश रावल के रेस्टोरेंट से कुछ प्रेरणा लें और जान-पहचान वालों को कभी-कभी चाय-कॉफ़ी भी पिलाते रहें जिससे उन्हें कैफ़े का महौल अपना सा लगे और वे वहाँ अधिक समय गुजारें।

१३- लोगों को ऐसी साइट्स के बारे में बतायें जिससे वे कैफ़े में अधिक समय गुजारें जैसे ऑरकुट। लोगों की रुचि जानकर उन्हें वेबसाइट्स के नाम बतायें।

१४- कभी-कभी यदि ग्राहकों को आपत्ति हो तो किसी हालिया प्रदर्शित हिट फ़िल्म के गीतों को भी धीमी आवाज में सुनवायें। या फ़िर ग्राहकों का मूड पढ़कर कुछ अलग टाइप का संगीत भी चलायें।

१५- लोकल केबल पर विज्ञापन निकलवा सकते हैं कि शहर का सबसे सस्ता और अच्छा सायबर कैफ़े।

१६- सायबर कैफ़े के बाहर कुछ उल्टे-सीधे पोस्टर चिपकाते रहें और समय-समय पर उन्हें बदलते भी रहें, कभी मूड हो तो कुछ अंग्रेजी में उन पर लिख दें जैसे- सायबर वर्ल्ड में तहलका, गूगल की मुफ़्त नयी सुविधाएं, वर्डप्रेस पर नयी योजनाएं।

१७- ग्राहकों को ब्लॉगिंग के बारे में बताएं और स्वयं का चिट्ठा बनाने में मदद भी करें। जो जिस भाषा का हो उसे उसी की भाषा में चिट्ठा बनाने को उकसायें, दीवारों पर सूचना लगा सकते हैं कि 'now be the publisher of ur own literature' या 'अपनी भाषा में खुद को अभिव्यक्त करें ब्लॉग्स्पॉट और वर्डप्रेस का प्रयोग करें' लोगों को बताएं कि वे खुद का डोमेन खरीद सकते हैं मात्र रुपये ५०० में।


मुफ़्त की सलाह देते देते सुझावों की ये श्रृंखला कुछ ज्यादा ही लंबी हो गयी। इसलिए अब नाहरजी से अनुरोध है कि इनमें से जो भी सुझाव उन्हें वयावहारिक लगें वे उन्हें आजमायें, हमारी शुभकामनायें उनके साथ हैं। इस प्रतियोगिता में वे विजयी हों।

साथ ही अन्य चिट्ठाकार बंधुओं से आग्रह है कि वे भी अपने-अपने अमूल्य (मुफ़्त) सुझाव टिप्पणी के माध्यम से दें और नाहरजी को इस रण में विजयी बनायें।

12 comments:

mahashakti said...

वाह भुवनेश जी, क्‍या सुझाव दिये है, मै भी कुछ सोचता हूं।

सागर चन्द नाहर said...

धन्यवाद भुवनेश जी
बहुत अच्छे सुझाव है, इन्हें आजमाना चालू कर दिया है। देखते हैं अब क्या फ़र्क पड़ता है।
एक बात बताइये आप कवि है, व्यंगकार भी है पर यह मार्केटिंग की कला कहाँ से सीखी?

Pankaj Bengani said...

एक बात हमेशा ध्यान में रखनी चाहिए, कि ब्रांड तभी चलता है जब वह वाकई में बेहतर हो। खराब ब्रांड की मार्केटिंग करना कोयले को जौहरी को बेचने जैसा है। तो सबसे पहले तो यह देखें कि आपका इनफ्रास्ट्रकचर या संसाधन यथासम्भव उच्च कोटी का हो।

>> देखिए कि आपके पीसी लेटेस्ट हैं, सारी सुविधाओं से परिपूर्ण हैं।

>> हजार हाथों में जाने से माउस और की बोर्ड की बारह बज जाती है, तो मैं तो कहुंगा कि चायना के माउस और की बोर्ड रखिए जो सस्ते आते हैं और कुछ दिन तक बडा अच्छा अनुभव देते हैं। हर दो तीन महिने मे बदल दिजीए।

>> लोगों को मुफ्त की चीजें हमेशा से अच्छी लगती आई है, तो कुछ ना कुछ फ्री तो होना ही चाहिए। मैं स्योर हुँ कि आप अमुक घंटे पर कुछ घंटे तो फ्री देते ही होंगे। भुवनेश की बात भी उचित है कि पहले दो ग्राहकों को कुछ फ्री में दो वगैरह। मैं जोडना चाहुंगा स्लोग घंटो में जब कि सबसे कम ट्राफिक रहता है कैफे में तब आकर्षक योजनाएँ दी जाएँ। सर्फिंग का रेट थोडा घटाया जा सकता है इस समयकाल में।

>> कैफे कहाँ पर है वो भी महत्वपूर्ण है और किस तरह के लोग आते हैं वो भी। अगर कॉलेज के आसपास है तो भुवन भैया ने अच्छे जुगाड बताए हैं। पर अगर नही है तो आप फेमिली कैफे बनाने पर जोर दिजीए। कि घरबार के हर किस्म के लोग आ सकते हैं।

>> फिक्सड ग्राहकी सेवा तो शायद आप चलाते ही होंगे। यानि कि आप 100 घंटे सर्फ करो तो यह फायदा वगैरह। पैकेज डील आदि। पर साथ साथ यह भी कर सकते हैं कि ग्राहक को ओफर दिया जाए कि वो और ग्राहक जुटाए और अपनी सर्फीग में डिस्काउंट पाए। 10 ग्राहक ढुंढकर लाए और 10% डिस्काउंट पाए।

>> जहाँ लोग बैठते है सर्फिंग करने वहाँ लोगों के टेस्टीमोनियल थोडे बडे अक्षरों मे प्रिंट करके लगा दें कि उन्हे क्यों आपके कैफे में ही सर्फिंग करना अच्छा लगता है।
किसीसे लिखवाने की जरूरत नहीं है। खुद ही सुनिल, प्रिया और राजीव बन जाइए और लिख डालिए। कौन चेक करने आने वाला है।

राजीव, College Student : I regulerly visit Spider Cyber cafe. I like the environment and the speed they are providing. No doubt this is the best cafe in the city."

Priya, housewife : I usually chat with my brother who residing in US. I like the homely atmosphere. NO nonsense, Spider is the best.

cont...

भुवनेश शर्मा said...

नाहरजी ना तो मैं कवि हूँ ना ही व्यंग्यकार हाँ थोड़े खुराफ़ाती दिमाग का इंसान हूँ।

पंकज भैया ने भी बहुत अच्छे सुझाव रखे हैं उन्हें भी आजमायें।

अनूप शुक्ला said...

ये तो बढिय़ा उपाय बता गये मजे-मजे में.

Udan Tashtari said...

अच्छे फंडे हैं, साईबर कैफे के तो ठीक, सागर भाई के लिये, कुछ ब्लाग चलाने के भी धरे हो क्या...बताओ, कैसे कामर्शियल बनाया जाये, भाई, फ्री मे बहुत हुआ अब तो!!! :)

प्रभाकर पाण्डेय said...

अच्छे सुझाव वो भी आकर्षक भाषा में ।

भुवनेश शर्मा said...

कुंडलिया नरेश ब्लॉग के बारे में तो आप ही बेहतर जानते हैं, वैसे रविरतलामीजी हैं ना इस बारे में सलाह देने के लिए।
मेरे दिमाग में कुछ आया तो जरूर बताऊँगा।

Jitendra Chaudhary said...

वाह वाह! मजा आ गया।
ये हुई ना बात। आपने तो पूरा पूरा इन्टरनैट कैफ़े पुराण ही लिख दिया, कुछ बाते मेरे दिमाग मे भी है,जल्द ही लिखता हूँ।

Anonymous said...

जीतू जी की टिप्‍पणी है कि किसी जीतू-2 की, :-)

Sociologist Dr. Anil said...
This comment has been removed by the author.
navnath sase said...

भुवनेशजी मै केफे सुरु करणा चाहता हू क्या आप मुझे बतायीगे कि इसके लिये कोई सरकारकी परमीशन निकालनी पडती है ...?